Romentic Story Aquarium Fish ~ Machliyaan मछलियां |

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कल श्याम को जब Mukesh घर लौटे तो साथ में एक्वेरियम ले आए Living Room में लगे मेरे द्वारा बनाया गया Wall Hegig को हटवाकर वहां पर बड़ी सी table लगवाई और उस पर बड़े से एक्वेरियम को रखवा दिया। अरे Yaar Wall Hegig ना आजकल Old Fashion हो गया है और देखो इस पर धूल भी जमा हो गई है तुम चाहो तो अपने Room में लगवा लो Living Room में आने वालों पर अच्छा Imprection नही बनता कहने को तो ये बात Mukesh ने बड़े pyaar से कहि थी। लेकिन मुझे क्यों न चुभती कितनी मेहनत से रात भर जाग कर पूरा किया था इस Wall Hegig को एक्वेरियम लाने से पहले एक बार पूछना भी मुनाफित नही समझा।

 Mukesh ने कहा तुम्हारे लिए लेकर आया हूँ। एक बार तुमने कहा था ना की मुझे मछलियां बहुत पसंद है अपनी इच्छाओ को दूसरे की इच्छाओं को मना लेने की कला में महाहिर हो गए थे mukesh। मन किया कि कह दू की मेने ये नही कहा था कि मुझे कैद की हुई मछलियां पसन्द है। में तो आजाद मछलियों को पसंद करती हूँ। वो जो अपनी इच्छा से पानी में गोते लगाती है। मन मर्जी करती रहे। फिर सोचा की इतने दिनों बाद तो एक सच्ची मुस्कराहट आई है इस एवर ग्रीन चेहरें पर इसलिये खुद को कहते-कहते रोक लिया। कुछ देर शीशे के अन्दर बन्द मछलियों के साथ छेड़ खानी करते रहे।कुछ ही देर में उनका शोक पूरा हो गया। तो जाकर T V खोल लिया News चैनल की सराफा बाजार की उस उबाहु दुनिया में खो गये।

 मैं काफी देर तक उन रंग-बिरंगी मछलियों को पानी में बेचैन होके देखती रही। मुझे लगा की जैसे मैं भी उन मछलियों में एक मछली हूँ। किसी जगमगाते रगीन शीशे में बद और जो बाहर से देखने पर बहुत सुदंर लगती है। लेकिन अंदर रहने वाली मछली को कैसा महसुस होता है। ये कोई नही जानता। रात को खाना खाने के बाद mukesh जब सोने के लिए आए तो अचानक बोले Yaar में तुम्हे बताना भूल गया कि वो जो डॉ. Mahaveer है ना उनके लड़के की रिसेप्सन कु Party है वहाँ चलना है। बहुत पुराने क्लाइंट है। अपने कह रहे थे की भाभी जी को भी जरूर लाना mukesh ने मुस्कराते हुए कहा Mukesh जब मुस्कराते है तो पता नही अब वो मुस्कराहट भी बनावटी सी लगती है। जैसे किसी ज्वैलरी Show room में किसी ग्रहाक को गहना बेंचने के लिए ना चाहते हुए भी मुस्कराते है। रोज-रोज ग्राहकों के सामने मुस्कराते-2 मुस्कराहट भी मसीनि हो गई थी।

 अब बता रहे है थोड़ा जल्दी बता देते तो में तैयारी कर लेती। Sorry Yaar Time ही नही मिला Mukesh ने कहा फिर सफाई पर मलाई लगाते हुए कहा तैयारी करने की क्या जरूरत है। तुम तो हो ही इतनी सुन्दर, ये कहकर Mukesh ने मेरे बालों पर हाथ फेर दिया और में मुँह फेरकर बैठी रही। पता नही आज का दिन ही पूरा अच्छा नही लगा। मैं ही ऐसी हो गई थी वक़्त के साथ या Mukesh ही बदल गए थे। मैं कल दिन में Driver को भेज दूँगा तुम जरा मंहगी वाली साड़ी खरीद लेना थोड़ा high fai लोग है। अगर में कहु की मुझे नही जाना तो। मैने दबी हुई आवाज में कहा। Mukesh ने कहा तुम्हारे पास ऑप्सन ही कहाँ है। अगर तू नही गई टी मै भीनही  जाऊँगा।

 Mukesh फिर मुस्करा दिए। वही काउन्टर के पीछे वाली मसीनि मुस्कराहट थी। अच्छा चलो good night कहकर mukesh bed पर सौ गए। और में सोचती रही की कल रिसेप्सन पर जाना इतना जरूरी क्यों है। बस इसलिए की मुकेश को कुछ अछे क्लाइन्ट मिल जाएंगे। सुबह-2 उठी तो mukesh एक्वेरियम के पास ही खड़े थे। शीशे के ऊपर टक-टक करते ताकि मछली उसकी तरफ तैरती हुए आए। लेकिन मछलियां सहन के दूर भाग जाती। क्यों परेसान कर रहे है इनको सुबह -सुबह मैने अंगड़ाई लेते हुए कहा। मछलियां परेसान नही होती है sunita। मुकेश ने इतने आत्म-विस्वास से कहा था जैसे ये दुनिया का सब से बड़ा सच्च हो ये आप कैसे कह सकते है। मैने जानना चहां मुँह से जैसे ये दुनिया का सबसे अजीब चुटकला हो जो अभी-2 ने कहा था। और में पैर पटकती हुई किचन की और चली आई। इसी किचन में कभी Mukesh ने मुझे कॉफी बनानी सिखाई थी। यहां पर कदम रखते ही वह पुरानी यादें ताजा हो गई।

 ये सब देखा तो पता चला की अच्छा वक़्त को बहुत वर्ष बीत गए है। Mukesh ने कहा कि तुम्हे गैस On करनी आती है। मैंने कहा हाँ और दुध उबालना वो भी आता है। तो Basic तुम्हारी क्लियर है। कॉफ्फी बनानी तुम्हें यु आ जाएगी। कहकर Mukesh ने चुटकी बजाई थी। Mukesh की यही बेपरवाही मुझको बहुत पसन्द आती थी। मैं किसी बात को लेकर परेसान होती तो Mukesh चुटकी बजाके कहता सब ठीक हो जाएगा। फिर वो मुझको अपनी बाहों में भर लेते है। और Mukesh की बाहों में जाते ही सब कुछ एक दम आसान लगने लगता है। जैसा में अभी एक चुटकी बजाऊगी और सारी परेशानिया अभी हल हो जाएगी। तीन महीने से बिस्तर पर पड़े पापा यु ही ठीक हो जाएंगे। मेरी second year की फीस ममी यु ही जुटा लेगी। मेरी शादी के ली प्रपोजल आने बंद हो जाएंगे। और यु ही पापा, ममी मेरी और Mukesh की शादी के लिए हाँ कर देंगे।

Mukesh को कई दिनों से ऐक्टिग का भूत स्वार हो गया था Mukesh और में दिल्ली से मुम्बई एक साथ आए थे। और वो एक्टर बनने और में M.B.A की पढ़ाई करने। उन्होने यहाँ एक अच्छा सा Flate ले लिया था। मैं अपने एक Room और छोटे से किचन में बोर हो जाती तो मै mukesh के flate में आ जाती। मैं जब भी यहां आती तो मुझको mukesh में एक नये किरदार की तरह नजर आते। कभी बाल खड़े करने का भूत, तो कभी दरवाजे के पीछे छिपकर मास्क पहन कर डरा देने की सनक,तो कभी 10 तरीको से प्रपोज करने का उत्साहा। इस एक mukesh में कितने तरह के mukesh देखे थे मैंने। तब नही मालुम था कि उन mukesh में से एक mukesh ये भी mukesh होंगे जो अपने सारे सपनो से हार मान जाएगे। अपने जिने के लिए वही तरीका चुन लेगें जो सभी चुनते है। वापस लौट आएंगे अपने Comfort jon में mukesh के flate की एक चाबी अक्सर मेरे पास ही रहती थी। वो नही होते तो में अक्सर उनके flate की साफ-सफाई करवा देती। उनके Room में इधर-उधर पड़ी चीज़ो को सवार के रखती तो ऐसा लगता कि अपनी  ज़िंदगी की बिखरावट को समेट रही हूँ। अच्छा लगता था उनके घर को अछि हालात में देखना।

 mukesh जब ओडिस्न से लौटे तो बहुत उदास लग रहे थे। मैने पूछा क्या हुआ उन्हें परेसान देख कर में भी परेशान हो गई। Break up Sunita मैने कहा मतलब। अब मुझसे और नही होगा। पापा चाहते है यहाँ में एक ज्वैलरी Show room खोल कर एक नई ब्रान्च बनाऊ। और उनके बिजनस को आगे बढ़ाऊ। सब सेट है बस मुझे अपने हाथों में लेना है। फ़ालतू में इतना स्ट्रगल करना कोई मतलब नही है। ये एक्टर बनना मेरे बस की बात है ही नही। मुझे समझ नही आ रहा था कि इस बात पर कैसे रिएक्ट किया जाए। उस समय Mukesh का इस तरह से हार मानना अच्छा नही लगा था। लेकिन कुछ देर बाद उन्होंने एक ऐसी बात कही की जिसने उस पल की वही थाम दिया ।

 Double Bed पर बिल्कुल अपने पास बिठाकर Mukesh ने कहा था कि मैने पापा से एक शर्त रखी है। मैने कहा क्या। मैंने हैरानी से पूछा था। मैने पापा से कहा था कि मैं आपका सारा बिजनस सम्भाल लूँगा। लेकिन मेरी और Sunita की शादी के लिए हाँ करनी होगी। और मेरी धड़कन थम सी गई थी उस पल में और पापा ने हमारी शादी के लिए हाँ कर दी है। Mukesh ने बात पुरी की और मैने खुसी से मुकेश को अपने गले लगा लिया। उस पल यह करना मेरे लिए आसान लगा था। Show room अच्छा चल पड़ा था। मेरी और mukesh की शादी को एक महीना हो गया था। लेकिन mukesh के new बिजनस के चलते हम हनिमून पर भी नही जा सके।

 Mukesh ने कहा कि अभी तो बिजनस चलना शुरू हुआ है। अभी अगर एक हप्ते के लिए बाहर गए तो बहुत नुक्सान हो सकता है। हम जाएगे पका किसी और दिन। एक हप्ता ना सही दो दिन के लिए तो जा सकते है। मैंने दबी आवाज में इच्छा जाहिर की थी। Mukesh मेरी बात को मान गए उन्होंने गोवा के पास में ही एक Restorent booking करवा ली। mukesh कहने को तो मेरे साथ गोवा आए थे हनिमून के लिए। लेकिन उनका सारा ध्यान Show room और बिजनस पर लगा रहा। क्लाइन्ट के फ़ोन थे जो थम ही नही रहे थे। ठलते सूर्ज की हल्की सी रोशनी में रेत पर बैठकर मैंने mukesh से पूछा क्या तुम अब कभी ऐक्टिग में ट्राई नही करोगे।

 Mukesh कुछ देर चुप रहे। तो मैने कहा mukesh अपने Fashion को ऐसे मत मरने दो। Mukesh को मेरी ये बात चूब गई थी। उन्होंने मेरी और देख कर कहां था। कि ये सब तुम्हारी वजह से ही कर रहा हूँ। ये सुन कर मुझे झटका सा लगा था। मेरी वजह से मैने हरानी से पूछा। अगर में ये बिजनस नही सम्भालता तो पापा हमारी शादी के लिए हाँ नही करते। अगर मेने अपने fashion को सेक्रिफाइस किया है तो इसके पीछे तुम भी हो। कहने को तो ये बात mukesh ने मुस्करा के कही थी। ये सुन के मेरे पैरों तले से जमीन सिर्क गई। जमीन पर पड़ी रेत भी जैसे चुंबने लगी थी। अपनी असफलता के लिए Mukesh ने इतनी आसानी से मुझे जिमेदार ठहरा दिया।

Mukesh और मेरी शादी को दो साल होने को आए है। इन दो सालों के बीच मेरे और mukesh के बीच तकरीबन सब कुछ बदल गया है। जिसके होने से mukesh का साथ होना किसी जादू की तरह लगता था। एक जादू जिसकी गिरफ्त में आकर कब मैंने अपने बीमार पापा को हमेसा के लिए खो दिया। कब हमारी शादी से नाराज माँ ने मुझसे बात तक करना छोड़ दिया। कब में सब से दूर होकर mukesh के पास रह गई पता भी नही चला। और आज mukesh भी मेरे पास नही रहे गए थे। यह वह mukesh तो नही जिसको मैंने पागलों की तरह टूट के प्यार किया था। जिसकी एक चुटकी बजाते ही मेरी सभी problam का हल मिल जाता था। 

आज मैं mukesh की जिदद पर Party में आ ही गई थी। कई देर mukesh के dosto से बेमकसद बाते की और उसके बाद Room के बाहर बाल्कनी में आ गई। बाल्कनी में आकर धुंधले आसमान में मध्यम से टिमटिमाते तारो को देख कर एक और रात याद आ गई थी। Mukesh के साथ उनके flate पर बिताई गई रात। छत पर तारों से भरे उस काले आसमान के नीचे लेटे एक दम बेपर्वाहा होकर, मैने mukesh से पूछा। mukesh अगर तुम्हें मैं कहु की तुम्हें इंसान के अलावा कुछ और बनना हो तो तुम क्या बनना पसन्द करोगे। Mukesh ने कहा ये कैसा सवाल है। मैने कहा बताओ ना प्लीज मैने बच्चो की तरह जिदद की थी। mukesh ने कहा में समुंद्र बनना चाहुगा। जिसके सामने सब कुछ छोटे लगे। और मुकेश ने पूछा और तुम तो में मछली बनना चाहुगी। जो तुम्हारे बिना जी भी ना पाए। ये सुनकर Mukesh ने मुझे अपनी बाहों के समंद्र में समा लिया और मै उस समंद्र में तैरने लगी थी मछली की तरह।

Hello आप यहाँ बाल्कनी में क्या कर रही है। इस आवाज ने मुझे वापस उस दुनियां में लौटा दिया। Sorry मेने आपको पहचाना नही। मैंने चौकते हुए अपनी साड़ी ठीक करते हुए बड़े तालुक से कहां। उसने कहा मैं vikash ये कहकर 5 फुट 8 इंच के उस आदमी ने मेरी तरफ हाथ बढ़ाया कहा Hello मैने भी डरते हुए अपना हाथ बढा दिया। आप Sunita है ना Right,आप कैसे जानते है मुझे। vikash ने कहा हम Class Five तक एक साथ पढ़े है। मैने उसके चेहरे को गौर से देखा,दिमाक पर बहुत जोर देने के बाद भी वो चहेरा याद नही आ रहा था। मुझसे पुरानी पहचान जताते उस लम्बे चौड़े आदमी को देख के। मैंने एक बार फिर लिहाज से कहाँ मैंने पहचाना नही आपको,

Vikash ने कहा तब मेरी दाड़ी, मुछ नही थी ना मेरे, फिर कुछ झिझकते हुए आगे बोला प्लीज इतनी भोली बनने का नाटक मत करो। कितनी शरारती हुआ करती थी तुम बचपन में और मैं बहुत सीधा-साधा था। और तुम्हारा soft target मेरी white कमीज पर स्याही लगाने से लेकर मेरी पेन्ट पर चविगम चिपकाने तक के सारे काम किए है तुमने। कोकरोज यही नाम रखा था ना तुमने मेरा। ओहो कोकरोज Right, जिसकी नाक हर दम बहती रहती थी। और हिंदी की Teacher ने कहा था कि गगा का उदगम स्थल Vikash की नाक ही है। Right मेने कहां Right, हम दोनों काफी देर तक हस्ते रहे। मैं किसी यादो की नदी के किसी बहुत पीछे छूट चुके उस किनारे पर आ गई थी। जहाँ सब कुछ खुशनुमा था।

 Sunita से कहाँ अरे Yaar तुम तो बड़े handsome हो गए हो। तुम तो कहि बाहर चले गई थे आगे की पढ़ाई के लिए। हाँ M.B.A किया था और एक साल नोकरी जैसे ही अकल आई लोट आए इंडिया। Vikash से इतने सालों के बाद मिलकर बचपन की यादें ताजा हो गई थी। हम बाल्कनी में खड़े-2 पुराने दिनों के बारे में गप्पे मारते रहे और उस बिच mukesh बड़े लोगो से मिलने में इतने व्यस्त थे की उन्हें ये भी याद नही रहा की मैं कहाँ हूँ किससे मिल रही हूँ। Vikash ने कहा अच्छा तो में निकल रहा हूँ। कल सुबह Office थोड़ा जल्दी जाना है।

 Vikash ने कहा कि तुम चाहो तो में तुम्हे Drop कर देता हूँ। मैने कहा नही मेरे husband आए है मेरे साथ में।Vikash ने Bye कहकर अपनी जेब से विजटिग कार्ड निकाला और मुझे दिया और कहाँ call me हाँ मेने कहां ok,हम दोनों अपनी बात चित खत्म करके होल में वापस लौट आए। उस होल में जो अभी भी लोग उन बातों में व्यस्त थे। जिनका आखरी मकसद था अपने-2 क्लाइन्ट के साथ डील set करना। Mukesh भी इन भीड़ में एक था जो मुस्करा-2 के लोंगो के number phone में save कर रहा था।

Night को party से लौटते वक़्त mukesh से मैने long drive पर चलने की बात कही तो उन्होंने मना कर दिया। Sunita किसी और दिन। कल सुबह showroom जाना है। एक बड़ा order आया है। हो सकता है कहि बाहर भी जाना पड़े। mukesh ने बिना मेरी और देखे गाड़ी drive करते हुए कहा। वो और दिन किसी और सदी में आएगा सोचती हुई में चुप-चाप होकर बैठ गई। क्या मुँह फुला लेती हो yaar बात-बात पर समझा करो ना जब  जो काम जरूरी हो तो करना ही पड़ेगा ना। मेरी इच्छाए कहा जरूरी लगेगी तुम्हे। हर बार की तरह होंठो पर चुपी की सील लगाके में आँखे बन्द करके उस वक्त को याद करने लगी जब mukesh का वक़्त मेरा वक़्त हुआ करता था और मेरा वक़्त तो mukesh का था ही हम दोनों के एक दूसरे की वक़्त की वक़्त हुआ करती थी। कहा चला गया वो वक़्त क्या ऐसी चीज ऐसे ही चली जाया करती है। आँखे नम होना चाहती थी लेकिन किसी तरह आँखों की पलको पर उस नम्मी को आने से रोक लिया था मैंने घर पहुँच कर भी हम दोनों में कोई बात नहीं हुई।

 mukesh चुप-चाप बिस्तर पर जाकर सो गए और में कुछ देर पढ़ने का नाटक करती रही । और ना जाने कब नीद के हवाले हो गई। सुबह उठी तो mukesh घर पर नही थे। mukesh ने phone पर message छोड़ा था कि अचानक कोलकाता जाना पड़ रहा है। कल तक लोट आऊँगा। मैं कुछ देर उदास सी इधर-उधर टहलती रही। समझ नही आ रहा था कि क्या किया जाए। paper पढ़ा tv पर सीरियल देखने शुरू किए लेकिन मन ही नही लगा। तभी याद आया कि एक्वेरियम में रह रही मछलियों को खाना भी देना है। खाने की उन गोलियों को फिश टैंक में डालते हुए उन आपस में झुझति मछलियों को देखा तो मन में एक ख्याल आया। अलग-अलग प्रजातियों की मछलियों को कैसे उनकी इच्छा के बगैर एक साथ रहने के लिए मजबूर कर देते है। लगा की जिदगी कभी-2 हम को भी एक साथ रहने के लिए मजबूर कर देती है। जिंदगी रिश्तों के शीशो में बंद ऐसा ही एक एक्वेरियम बनकर रह जाती है। शायद ये मछलियां मजबूर थी।

 लेकिन मैं इतनी कमजोर नही हो सकती की खुद को इन शीशो से अपने को आजाद ना कर सकु। इस ख्याल के आते ही Vikash का ख्याल आया उसके विजटिग कार्ड से उसका number देखा और फ़ोन किया। Hello Vikash मैं Sunita,hai Sunita बिल्कुल सही Time पर call किया है। आज मेरी sister का birthday है। हम एक party plaan कर रहे है। free हो तो आ जाना चलते है किसी अच्छी जगह। मेने कुछ सोचा और लगा की यहाँ घर पर बैठे-2 बोर होने से अच्छा है कि कहि घूम आया जाए। मैं vikash की sister की birthday party पर चली गई। कई दिनों के बाद दिन बहुत अच्छा गुजरा था। अच्छे से Restorent में lunch किया और नुकड़ के ठेले से चाट भी खाई। फुर्सत से एक बार फिर से दोस्ती की थी मेने पुराने दिनों के Vikash में mukesh की झलक मिल गई थी। वही खुश मिजाज mukesh, आज वही पुराने वाले mukesh को मैं बहुत Miss कर रही थी।

उस रात को मैं देर से घर लौटी Vikash मुझे अपनी कार में मेरे घर तक छोड़ने आया था। मैंने अन्दर चलने को कहा लेकिन मुझे गेट पर छोड़ने के बाद वापस चला गया। मैने द्रवाजेब पर चाबी लगाई दरवाजा खोला तो देखा की अन्दर के कमरे की light जली हुई थी। मेरी आहट पाते ही कमरे में एक हल चल हुई। mukesh तो सुबह आने वाले थे। तो कमरे में कौन हो सकता है। मेरी घबराहट बढ़ने लगी थी। मेरे दिल की धड़कन तेज चलने लगी थी। मै कमरे में जा ही रही थी कि mukesh living room में आ गए। मेरी साँस में साँस आई। आखो में डर अभी भी तेरे रहा था। चहेरे पर घबराहट अब भी बची थी। क्या हुआ मुझे देख कर डर क्यों रही हो mukesh ने कहा। mukesh की आवाज में शक साफ़ झलक रहा था। 

मैने पूछा mukesh तुम तो कल आने वाले थे ना। हाँ तो मेरा ही घर है क्या तुम्हे पूछ कर आना होगा क्या। वो मुँह फेर के उस खिड़की की और देखने लगे जो मेन गेट के सामने सड़क की और खुलती थी। जैसे कुछ तलाश रहे थे। Mukesh का ये अजीब सा चहरा मुझे अटपटा सा लगा था। नही मेरा मतलब मेने बस इतना ही कहाँ था की mukesh गुसे से बेकाबू हो गए। मैं बस मुकेश के चहरे की और देखती रही। वो चेहरा जो मेरे सामने था। एक दम अजनबी था। Mukesh धीरे-धीरे बदल तो रहे है। वो इतने बदल जाएगे में ये भूल के भी नही सोच सकती। मेने कहा क्या कहना चाहते है आप साफ-साफ कहिये mukesh, मेरी गैर मजूदगी में मेरी पत्नी पूरा दिन किसी और के साथ बाहर रहती है। और वो इतनी रात को घर छोड़ने आता है। तो इसका और क्या मतलब समझु।

 mukesh इस हद तक जा पहुँचे थे की जहाँ चुप रहना खतरनाक था। ना बल्कि मेरे लिए बल्कि मेरे आत्म समान  के लिए भी। Mukesh क्या मेने तुमसे कभी सवाल किया है। कि मेरी बगैर मजूदगी में पूरा दिन भर क्या करते हो, कहा रहते हो,किससे बाते करते हो। क्या उस दिन Party में किसी और लड़की से बात नही की थी तुमने। हाँ Kind your information क्योकि वो मेरा बचपन का dost है। उसके साथ बात करने और मिलने के लिए मुझे किसी की भी Permission की जरूरत नही है।

अपने पति की भी नही, आज पहली बार mukesh को मेंने तुम कहाँ था। पुरे दो साल बाद मेरा धेर्य जबाब दे गया था। मैंने अपने हाथ में रखी घर की चाबियों को जोर से पटका, मुझे ध्यान ही नही रहा की चाबियों का छल्ला भारी था। और सामने mukesh का लाया हुआ एक्वेरियम था। चाबियों का छल्ला एक्वेरियम की दीवार से टकराते ही, एक्वेरियम चकना-चूर हो गया। उसके साथ ही बहुत कुछ चकना-चूर हो गया था। जो दिखाई तो नही दिया जो टूटे हुए शीशो से ज्यादा गहरा चुबा था। जमीन पर रंग-बिरंगी मछलियों बिखरी हुई तड़फ रही थी। उनके रंग एक दम फीके पड़ गए थे। मैं जल्दी से एक बाल्टी में पानी भर के लेके आई और उन मछलियों को बाल्टी में डाल दिया। शायद आज उन मछलियों के आजाद होने का वक़्त आ चुका था। आजादी के उतावली उन मछलियों में एक मछली में भी थी...
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1 comments:

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HindIndia
admin
2 January 2017 at 02:47 ×

नये साल के शुभ अवसर पर आपको और सभी पाठको को नए साल की कोटि-कोटि शुभकामनायें और बधाईयां। Nice Post ..... Thank you so much!! :) :)

Congrats bro HindIndia you got PERTAMAX...! hehehehe...
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