Best Heart Touching Story in Hindi - अजनबी हमसफ़र


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मै आपसे पिछली Post में Heart Touching Love Story in Hindi-आखरी ख़त आपसे Share कर चूका हूँ अगर अपने नहीं पढ़ी तो जरुर पढ़े बहुत ही Heart Touching Love Story है | आज मै आपसे ऐसी कहानीShare कर रहा हूँ - जो दिल को छु जाये Best Heart Touching Story in Hindi - अजनबी हमसफ़र जरूर पढ़िए और अच्छी लगे तो अपने दोस्तों के साथ जरुर Share करे ।।


Best Heart Touching Story in Hindi - अजनबी हमसफ़र

वो Train के Reservation के डब्बे में Bathroom के तरफ वाली Extra Sheet पर बैठी थी, उसके चेहरे से पता चल रहा था कि थोड़ी सी घबराहट है उसके दिल में, कि कहीं TT ( traveler's ticket examiner ) ने आकर पकड़ लिया तो ? कुछ देर तक तो पीछे पलट-पलट कर TT के आने का इंतज़ार करती रही । शायद सोच रही थी कि थोड़े बहुत पैसे देकर कुछ निपटारा कर लेगी, देखकर यही लग रहा था कि जनरल डब्बे में चढ़ नहीं पाई इसलिए इसमें आकर बैठ गयी, शायद ज्यादा लम्बा सफ़र भी नहीं करना होगा । सामान के नाम पर उसकी गोद में रखा एक छोटा सा Bag दिख रहा था।   

मैं बहुत देर तक कोशिश करता रहा पीछे से उसे देखने की कि शायद उसका चेहरा सही से दिख पाए लेकिन मै हर बार असफल ही रहा। फिर थोड़ी देर बाद वो भी खिड़की पर हाथ टिका कर सो गई और मैं भी वापस से अपनी किताब पढ़ने में लग गया।



लगभग 1 घंटे के बाद TT आया और उसे हिलाकर उठाया।
कहाँ जाना है बेटा
अंकल अहमदनगर तक जाना है
टिकेट है ?
“नहीं अंकल... जनरल का है लेकिन वहां चढ़ नहीं पाई इसलिए मै यहाँ आकर इसमें बैठ गई ”
अच्छा 300 रुपये का Penalty बनेगा
Oh … अंकल मेरे पास तो लेकिन 100 रुपये ही हैं
ये तो गलत बात है बेटा Penalty तो भरनी पड़ेगी
Sorry Uncle मैं अगले Station पर General में चली जाउंगी, मेरे पास सच में पैसे नहीं हैं, कुछ परेशानी आ गई , इसलिए जल्दबाजी में घर से निकल आई और ज्यादा पैसे रखना भूल गई 
बोलते बोलते वो लड़की रोने लगी TT उसे माफ़ किया और 100 रुपये में उसे अहमदनगर तक उस डब्बे में बैठने की Permission दे दी | TT के जाते ही उसने अपने आँसू पोंछे और इधर-उधर देखा कि कहीं कोई उसकी ओर देखकर हंस तो नहीं रहा था।

थोड़ी देर बाद उसने किसी को फ़ोन लगाया और कहा कि उसके पास बिलकुल भी पैसे नहीं बचे हैं Ahmednagar Station पर कोई जुगाड़ करके उसके लिए पैसे भिजा दे, वरना वो समय पर गाँव नहीं पहुँच पायेगी।

मेरे मन में उथल-पुथल हो रही थी, न जाने क्यूँ उसकी मासूमियत देखकर उसकी तरफ खिंचाव सा महसूस कर रहा था, दिल कर रहा था कि उसे पैसे देदूं और कहूँ कि तुम परेशान मत हो और रो मत लेकिन एक अजनबी के लिए इस तरह की बात सोचना थोडा अजीब था। उसकी शक्ल से लग रहा था कि उसने कुछ खाया पिया नहीं है शायद सुबह से और अब तो उसके पास पैसे भी नहीं थे। बहुत देर तक उसे इस परेशानी में देखने के बाद मैं कुछ उपाय निकालने लगा जिससे मैं उसकी मदद कर सकूँ और फ़्लर्ट भी ना कहलाऊं। फिर मैं एक पेपर पर नोट लिखा, 

बहुत देर से तुम्हें परेशान होते हुए देख रहा हूँ, जनता हूँ कि एक अजनबी कम उम्र लड़के का इस तरह तुम्हें नोट भेजना अजीब भी होगा और शायद तुम्हारी नज़र में गलत भी, लेकिन तुम्हे इस तरह परेशान देखकर मुझे बैचेनी हो रही है इसलिए यह 500 रुपये दे रहा हूँ , तुम्हे कोई अहसान भी ना लगे इसलिए मेरा Address भी लिख रहा हूँ जब तुम्हें सही लगे मेरे Address पर पैसे वापस भेज सकती हो, वैसे मैं नहीं चाहूँगा कि तुम वापस करो.

मैंने एक चाय वाले के हाथों उसे वो नोट देने को कहा और मैंने चाय वाले को मना किया कि उसे ना बताये कि वो नोट मैंने उसे भेजा है। नोट मिलते ही उसने दो-तीन बार पीछे पलटकर देखा कि कोई उसकी तरह देखता हुआ नज़र आए तो उसे पता लग जायेगा कि किसने भेजा । लेकिन मैं तो नोट भेजने के बाद ही मुँह पर चादर डालकर लेट गया था। थोड़ी देर बाद मैंने चादर का कोना हटाकर देखा तो उसके चेहरे पर मुस्कराहट महसूस की, लगा जैसे कई सालों से मुझे इस एक मुस्कराहट का इंतज़ार था।

उसकी आखों की चमक ने मेरा दिल उसके हाथों में जाकर थमा दिया, फिर चादर का कोना हटा- हटा कर हर थोड़ी देर में उसे देखकर जैसे सांस ले रहा था मुझे पता ही नहीं चला कब मेरी आँख लग गयी और जब आँख खुली तो वो वहां नहीं थी |

Train Ahmednagar Station पर ही रुकी थी और उस सीट पर एक छोटा सा नोट रखा था, मैं झटपट मेरी सीट से उतरकर उसे उठा लिया और उस पर लिखा था "Thank You मेरे अजनबी हमसफ़र" आपका ये अहसान मैं ज़िन्दगी भर नहीं भूलूँगी मेरी माँ आज मुझे छोड़कर चली गयी हैं घर में मेरे अलावा और कोई नहीं है इसलिए आनन – फानन में घर जा रही हूँ ।



आज आपके इन पैसों से मैं अपनी माँ को शमशान जाने से पहले एक बार देख पाऊँगी | बीमारी की वजह से उनकी मौत के बाद उन्हें ज्यादा देर घर में नहीं रखा जा सकता। आज से मैं आपकी कर्ज़दार हूँ जल्द ही आपके पैसे लौटा दूँगी।

उस दिन से उसकी वो आँखें और वो मुस्कराहट जैसे मेरे जीने की वजह बन गए थे  Heart Touching Story in Hindi - अजनबी हमसफ़र

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3 comments

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HindIndia
admin
30 November 2016 at 23:13 ×

बहुत ही बढ़िया आर्टिकल है ... Thanks for this article!! :) :)

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